सफल चुगलखोर (व्यंग लेख)

 

सफल चुगलखोर (व्यंग लेख)



सफल चुगलखोर (व्यंग लेख)

 
 

कोरोना महामारी के चलते मैं अत्यन्त परेशान हूं क्योकि बिना घुमक्कड़ी के लेखनी में नवाचार नही आता जिससें पाठको की भीड़ जुटा पाना भी काफी मुश्किल हो जाता है। खैर, अब अनलॉक हो रहा है तो मैं भी धीमें- धीमें अपनी लेखनी को अनलॉक कर रहा हूं तथा नवीन लेख लिख रहा हूं। मैने अपनें लेख का शुभारम्भ किया ही था तभी मेरा पुराना चेला कनचप्पा लाल आ धमका, उसका यह नामकरण मेरे द्वारा प्रदत्त हास्यपद उपहार ही है। 


आऔं कनचप्पा, बताओ कैसे आना हुआ ? सब कुध ठीक-ठाक चल रहा है ना..
अरे नही गुरूदेव, बहुत परेशान हूं नौकरी पेशा में भी बहुत परेशानी आ रही है। गुरूदेव आप ही कुछ हल निकालिए कि जिससे मेरी बेपटरी की जिन्दगी पटरी पर आ जायें, कोई सफलता का शोर्टकट उपाय बताइये या कोई शोर्टकट कोर्स बताइये।


देख बेटा कनचप्पा, वैसे तो बाजार में शोर्टकट कई कोर्स चल रहे है पर वह सफलता दिलवानें का दावा तो करते है लेकिन उनके दावे वैसे ही उखड़ते दिखायी पड़ते है जैसे पहली बरसात के बाद नई नवेली सड़क।
तभी तो गुरूदेव मैं आपके पास आया हूं....


देखो एक बहुत पुराना और पेटेन्ट तरीका बताता हूं जो हिडिन रूप में देशी बाजार के साथ-साथ अर्न्तराष्ट्रीय बाजार में भी खूब चल रहा है।
जी जी, यह कौन सा कोर्स है जल्द बताइयें .....
कनचप्पा, जल्द का काम शैतान होता है... मैनें हल्की सी डांट लगाते हुये कहा
क्षमा गुरूदेव, क्षमा ...आप आराम से इसका बखान करें............
कनचप्पा, आज सफलता का सबसे प्रभावी और शोर्टकट तरीका है चुगलखोरी ...


आज से तुम चुगलखोरी करना प्रारम्भ कर दो, फिर देखो कि तुम्हारी रूकी गाड़ी कैसे दौड़ती है।
लेकिन गुरूदेव आप इस नवीन शब्द को और अधिक स्पष्ट करें तथा इसके प्रभाव भी बतायें।


नही नही बेटा कनचप्पा, चुगलखोरी को नवीन शब्द समझनें की जरा सी भी भूल मत करना। यह अति प्राचीन और सफल तरीका है जिसे अपनानें के बाद कोई भी रंक मंत्री बन जाता है, रातो रात लोगो की किस्मत बदल जाती है। विभागो में तो यह पदोन्नति व वेतन वृद्धि में रामवाण औषधि के रूप में संजीवनी का काम करती है। सरल भाषा में कहे तो किसी बड़े अधिकारी से भी बात करनें के लिए तुम्हे किसी चुगलखोर के जरियें ही गुजरना होगा, और उसकी सुविधा शुल्क रूपी दक्षिणा देनें के बाद तुम्हारे सभी काम चुटकियों में पूरे हो जायेगे।


आज चुगलखोरी एक साइड बिजनिस के रूप में खूब फल-फूल रहा है, क्योकि इसमें नाम के साथ- साथ ऊपरी कमाई भी रोज होती है। बिना पड़े लिखे लोग भी पढ़े लिखो के कान काट रहे है और तुम तो फिर भगवान कृपा से ग्रेजुएट हो। इस तरह से तुम कहलाओगे एक ग्रेजुएट चुगलखोर....


एक ओर नया नामकरण... यह क्या गुरूदेव .......
अरे बेटा, यह नामकरण ही तुम्हारा कल्याण करेगा और इसे तुम मेरा उपहार ही समझों... लेकिन मुझे इसमें करना क्या होगा..........कनचप्पा नें अति उत्सुकता के साथ पूछा ?
यह तुम्हारा प्रश्न अति उत्तम है, ध्यान से सुनों .....


इसमें करनें के लिए तुम्हे अपनें आस-पास के लोगो की छोटी-छोटी बातो को अपनें अधिकारी तक पहुंचाना होगा वो भी थोड़े मिर्च मसाले के साथ और बढ़ा-चढ़ा कर इधर की उधर बाते करनी है या सीधे तौर पर कहे तो चुगलखोरी करनी है। 


ठीक है गुरूदेव, ठीक है मैं आपके गूढ़ ज्ञान को समझ गया, कृपया मुझे अपना आर्शीवाद प्रदान करें जिससें मै एक सफल चुगलखोर बन सकूं...


मेरा आर्शीवाद तो सदैव तुम्हारे साथ है, चुगलखोरी के रुझान तुम्हे शुरूआती दिनों में ही मिलनें लगेगे तो तुम अपनें गुरूदेव को भूल मत जाना, और इससे अर्जित लाभ का व्यौरा बताने जरूर आना, यहीं तुम्हारी असली गुरू दक्षिणा होगी।


ठीक है गुरूदेव, जैसी आप की आज्ञा
इस प्रकार कनचप्पा गुरू से आशीष लेकर निकल पड़ा एक सफल चुगलखोर बननें।



लेखक
गौरव सक्सेना


Gaurav Saxena

Author & Editor

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