स्वत्रन्त्रता दिवस के प्रति हमारी भागीदारी

 

स्वत्रन्त्रता दिवस के प्रति हमारी भागीदारी

स्वत्रन्त्रता दिवस के प्रति हमारी भागीदारी
 



आज देश अपना 74वां स्वत्रन्त्रता दिवस मना रहा है और इस शुभ पावन अवसर पर हमारा कर्तव्य बन जाता है कि हम सभी भारत मॉ की  स्वत्रन्त्रता के लिए अमर वीर बलिदानी योद्धाओं, वीर सपूतो और स्वत्रन्त्रता संग्राम सेनानियों को आदरपूर्वक याद करें। जिन्होनें देश की स्वत्रन्त्रता के लिए अपना सर्वस्य न्यौछावर कर दिया था। लेकिन आज के परिवेश में स्वत्रन्त्रता के अर्थ को व्यापक दृष्टिकोण से समझने की नितान्त आवश्यकता है। सर्वप्रथम देश की एकरूपता, अखण्डता और भाईचारे पर सोचना होगा कि क्या हम आजादी के बाद से अब तक इन विषयों पर खरे उतरे है या नही ? इस ओर आज हम सबकों गहन मंथन करना होगा तथा अपनें मन में श्रृद्धा से पूर्ण करनें हेतु संकल्पवद्ध होना होगा।  


किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए एकता एक अहम स्थान रखती है। जिस तरह देश की स्वत्रन्त्रता से पूर्व केवल अंग्रेजी हुकूमत की जड़ों को विध्वंश करना ही हर एक देशवासी का लक्ष्य था और देश प्रेम की बलवती भावना का संचार हर ह्दय में अविरल प्रवाहित होता था, उसमें यकीनन आज कमी दिखायी पड़ती है। स्वत्रन्त्रता दिवस को हम एक सकल्प दिवस तथा प्रेरणा दिवस के रुप में आत्मसार करें।


हमें आज अपनी समस्याओं से ही सीखकर आत्मनिर्भर हो एकजुटता के साथ देश के उत्थान में अपनी–अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। तथा छोटी–छोटी संकीर्ण मानसिकता का परित्याग कर वसुधैव कुटुम्बकम की सोच को अपनाना होगा। किसी भी प्रकार के बहकावे में आकर देश की एकता को खंड़ित होनें से बचाना होगा। समझना होगा कि देश में चन्द कुंठित मनोस्थिति से ग्रसित लोग अपनें स्वार्थवश आये दिन अपनी घटिया सोच का प्रदर्शन करते रहते है। हमें इन सभी से बचना होगा। 


आज सम्पूर्ण भारत को पुन: विश्व गुरू बननें के पथ पर उड़ान भरनी होगी तथा आत्मनिर्भर हो स्वदेशी उत्पादों पर विश्वस्तरीय उपलब्धि भी प्राप्त करनी होगी जिससें कि चंहु ओर देश में खुशहाली हो सके तथा सभी का विकास हो सके। तथा भारत को आज आवश्यकता है कि हम उन वीर सपूतों के अधूरे सपनों को पूरा कर एक नयें भारत का सृजन करें। 


लेखक एवं समाजसेवी
गौरव सक्सेना


Gaurav Saxena

Author & Editor

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